
< ....बात कुछ खास नही पर फिर बी खास है,
....बात कुछ खास नही पर फिर भी मुझे अब तक याद है,
....बात कुछ खास नही पर फिर भी दिलोदिमाग पर छा जाती है,
....बात कुछ खास नही पर फिर भी जब भी याद आती है रुला जाती है....
.............बात बच्चपन की है, जब उन अमीर घरो के बच्चो को स्कूल, गाद्दियो से आते देखती थी, अछ्छी पोशाके पहने, रोज कुछ न्या खाते देखती थी..
.............हर पल कुछ अलग था उनका..इसी बात को दिल ही दिल मे हर वक्त सोचती थी.. shonali

